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Best Gastroenterologist in Varanasi: पेट, लिवर और आंत की गंभीर आपातकालीन स्थितियां और उनका एडवांस आईसीयू (ICU) प्रबंधन

उत्तर प्रदेश के पूर्वांचल और वाराणसी में खान-पान की बदलती आदतों, दूषित पानी के सेवन और लाइफस्टाइल से जुड़ी बीमारियों के कारण पेट, आंत और लिवर से संबंधित मरीजों की संख्या में तेजी से इजाफा हुआ है। जब भी किसी को पेट में तेज दर्द, मरोड़, अपच या पीलिया जैसी समस्या होती है, तो उनकी पहली प्राथमिकता इंटरनेट पर Best gastroenterologist in Varanasi या फिर Stomach infection specialist doctor Varanasi खोजने की होती है।

निश्चित रूप से, पेट की सामान्य और क्रोनिक (पुरानी) बीमारियों जैसे गैस, कब्ज, एसिडिटी, कोलाइटिस या आईबीडी (IBD) के शुरुआती इलाज के लिए एक गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट की सलाह सर्वोत्तम होती है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि पेट और लिवर का एक साधारण सा दिखने वाला इन्फेक्शन कब एक जानलेवा मेडिकल इमरजेंसी का रूप ले लेता है? जब स्थिति पेट के इन्फेक्शन से आगे बढ़कर मल्टी-ऑर्गन फेलियर (Multi-Organ Failure), सेप्टिक शॉक (Septic Shock) या गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल ब्लीडिंग (GI Bleeding) तक पहुंच जाती है, तो वहां मरीज को केवल ओपीडी परामर्श की नहीं, बल्कि एक उच्च स्तरीय क्रिटिकल केयर विशेषज्ञ (Intensivist) और आधुनिक आईसीयू प्रबंधन की आवश्यकता होती है।

इस विस्तृत वैज्ञानिक लेख में, हम वाराणसी के चितईपुर स्थित स्टार मल्टीस्पेशलिटी हॉस्पिटल (Star Multispeciality Hospital, Chitaipur) के निदेशक और एम्स दिल्ली (AIIMS New Delhi) से प्रशिक्षित देश के जाने-माने क्रिटिकल केयर व मल्टी-ऑर्गन विशेषज्ञ डॉ. एस. एस. बेहरा के चिकित्सीय अनुभवों के आधार पर समझेंगे कि पेट, लिवर और किडनी की आपातकालीन स्थितियों में कब और कैसे त्वरित फैसले लेकर किसी मरीज की जान बचाई जा सकती है। याद रखें, गंभीर स्वास्थ्य स्थितियों में “सही जानकारी ही आपका सबसे बड़ा बचाव है।”

Best gastroenterologist in Varanasi and critical care doctor Dr SS Behera

⚕️ गैस्ट्रोएंटरोलॉजी बनाम क्रिटिकल केयर: मरीजों को कब किसकी आवश्यकता होती है? (The Smart Transition)

चिकित्सा विज्ञान के दृष्टिकोण से मरीजों को यह समझना बेहद जरूरी है कि गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट (Gastroenterologist) और क्रिटिकल केयर स्पेशलिस्ट (Critical Care Specialist) के कार्यक्षेत्र में क्या अंतर है, ताकि वे आपातकालीन स्थिति में बिना समय गंवाए सही अस्पताल पहुंच सकें।

[पेट/लिवर की समस्या के शुरुआती लक्षण]

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[सामान्य व पुरानी बीमारियां] [गंभीर व आपातकालीन स्थितियां]
(गैस, कब्ज, पेट दर्द, हल्का पीलिया) (खून की उल्टी, कोमा, अंगों का फेल होना)
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【Consult: Gastroenterologist】 【Consult: Critical Care Specialist】
(ओपीडी जांच, एंडोस्कोपी, नियमित दवाएं) (एडवांस ICU, लाइफ-सपोर्ट, डायलिसिस, सेप्सिस कंट्रोल)

  • गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट का कार्यक्षेत्र: ये डॉक्टर मुख्य रूप से पाचन तंत्र, पेट की परतों, पेट के अल्सर, एंडोस्कोपी (Endoscopy), कोलोनोस्कोपी (Colonoscopy) और पुरानी लिवर की बीमारियों के डायग्नोसिस और मेडिकल या सर्जिकल थेरेपी के विशेषज्ञ होते हैं।

  • क्रिटिकल केयर विशेषज्ञ (Intensivist) का कार्यक्षेत्र: जब पेट या लिवर की बीमारी के कारण मरीज का ब्लड प्रेशर अत्यधिक गिर जाता है, फेफड़ों में पानी भर जाता है, शरीर में गंभीर इन्फेक्शन (Sepsis) फैल जाता है, या किडनी काम करना बंद कर देती है, तब डॉ. एस. एस. बेहरा जैसे मल्टी-ऑर्गन स्पेशलिस्ट की भूमिका शुरू होती है। वे मरीज के वेंटिलेटर, ब्लड प्रेशर, इलेक्ट्रोलाइट्स और लाइफ-सपोर्ट सिस्टम को नियंत्रित करके अंगों को दोबारा जीवित करने का कार्य करते हैं।

🚨 पेट के गंभीर इन्फेक्शन और सेप्सिस (Stomach Infection Specialist Doctor Varanasi)

एक सामान्य पेट का इन्फेक्शन जिसे गैस्ट्रोएंटेराइटिस (Gastroenteritis) या ‘फूड पॉइजनिंग’ कहा जाता है, वह आमतौर पर कुछ दवाओं और ओआरएस (ORS) के घोल से ठीक हो जाता है। लेकिन कई बार, बैक्टीरिया या वायरस आंतों की दीवारों को भेदकर सीधे मरीज के रक्तप्रवाह (Bloodstream) में प्रवेश कर जाते हैं। यदि आप वाराणसी में एक योग्य Stomach infection specialist doctor Varanasi की तलाश में हैं, तो आपको इसके गंभीर और जानलेवा रूप ‘गैस्ट्रो-सेप्सिस’ (Gastro-Sepsis) के बारे में अवश्य जानना चाहिए।

पेट के इन्फेक्शन के आपातकालीन लक्षण:

  • लगातार पेट में असहनीय और तीव्र दर्द होना जो दबाने पर और बढ़ जाए (Acute Abdomen)।

  • बार-बार गहरे काले रंग का मल आना या दस्त में अत्यधिक खून आना।

  • लगातार तेज बुखार के साथ कंपकंपी छूटना और अचानक शरीर का ठंडा पड़ जाना।

  • ब्लड प्रेशर ($BP$) का अचानक बहुत कम हो जाना, जिससे मरीज अर्ध-बेहोशी या भ्रम (Confusion) की स्थिति में चला जाए।

आईसीयू में इसका प्रबंधन कैसे होता है?

जब कोई मरीज सेप्सिस की गंभीर स्थिति में स्टार हॉस्पिटल चितईपुर के आईसीयू में लाया जाता है, तो डॉ. बेहरा के नेतृत्व में तुरंत Targeted Antimicrobial Therapy और Hemodynamic Stabilization प्रोटोकॉल शुरू किया जाता है। मरीज के ब्लड प्रेशर को बनाए रखने के लिए विशेष दवाएं (Inotropes) दी जाती हैं और अल्ट्रा-आधुनिक मॉनिटरिंग के जरिए आंतों के इन्फेक्शन को पूरे शरीर में फैलने से रोका जाता है।

🟡 लिवर फेलियर और पेट में पानी भरना (Liver Specialist Hospital in Varanasi)

लिवर हमारे शरीर का सबसे बड़ा और महत्वपूर्ण केमिकल प्लांट है। अत्यधिक शराब के सेवन, फैटी लिवर के बढ़ने या हेपेटाइटिस बी और सी वायरस के इन्फेक्शन के कारण जब लिवर की कोशिकाएं पूरी तरह नष्ट हो जाती हैं, तो उसे लिवर सिरोसिस (Liver Cirrhosis) या लिवर फेलियर कहा जाता है। यदि आप इंटरनेट पर Liver specialist hospital in Varanasi खोज रहे हैं, तो आपको इसके गंभीर लक्षणों और उसके वैज्ञानिक उपचार की समझ होनी चाहिए।

लिवर फेलियर के कारण उत्पन्न होने वाली सबसे जटिल समस्या को स्थानीय भाषा में Pet me pani bharna lakshan aur ilaj के नाम से सर्च किया जाता है, जिसे मेडिकल भाषा में असाइटिस (Ascites) कहते हैं।

पेट में पानी भरना: लक्षण और कारण (Pet Me Pani Bharna Lakshan)

    • पेट का अचानक अत्यधिक फूल जाना: मरीज का पेट घड़े की तरह बड़ा हो जाता है, जबकि हाथ-पैर सूखने लगते हैं।

    • सांस लेने में भयंकर तकलीफ: पेट में अत्यधिक पानी (कभी-कभी 5 से 10 लीटर तक) भर जाने के कारण यह ऊपर की ओर डायाफ्राम पर दबाव डालता है, जिससे मरीज को लेटने या बैठने में भी सांस फूलने लगती है।

    • हेपेटिक एन्सेफैलोपैथी (Hepatic Encephalopathy): जब लिवर शरीर के टॉक्सिंस (जैसे अमोनिया) को साफ नहीं कर पाता, तो ये टॉक्सिंस सीधे मरीज के दिमाग तक पहुंच जाते हैं। इसके कारण मरीज अजीब हरकतें करने लगता है, दिन-रात का अंतर भूल जाता है और धीरे-धीरे कोमा में चला जाता है।

    • खून की उल्टी (Hematemesis): लिवर ब्लॉक होने के कारण भोजन की नली की नसें (Esophageal Varices) सूज कर फट जाती हैं, जिससे मरीज को अचानक मुंह से भारी मात्रा में खून की उल्टियां होने लगती हैं।

इसका सटीक इलाज क्या है? (Pet Me Pani Bharna Ilaj)

  • स्टार मल्टीस्पेशलिटी हॉस्पिटल में इसके लिए त्रिस्तरीय आपातकालीन उपचार उपलब्ध है:

    • Abdominal Paracentesis: एक विशेष और सुरक्षित सुई के जरिए अल्ट्रासाउंड गाइडेंस में पेट के अतिरिक्त पानी को धीरे-धीरे बाहर निकाला जाता है ताकि फेफड़ों पर से दबाव कम हो सके और मरीज आसानी से सांस ले सके।

    • Albumin Therapy: पानी निकालने के बाद शरीर में प्रोटीन के संतुलन को बनाए रखने के लिए बाहर से मानव एल्ब्यूमिन (Human Albumin) का इन्फ्यूजन दिया जाता है, जिससे दोबारा पेट में पानी न भरे।

    • Neuro-Critical Monitoring: मस्तिष्क को अमोनिया के प्रभाव से बचाने के लिए डॉ. एस. एस. बेहरा विशेष न्यूरो-क्रिटिकल केयर प्रोटोकॉल लागू करते हैं, जिससे मरीज को अचेत होने से बचाया जा सके।

🩺 किडनी फेलियर और क्रिटिकल डायलिसिस सपोर्ट (Best Hospital for Dialysis in Varanasi)

पेट और लिवर की गंभीर बीमारियों का सीधा असर हमारी दोनों किडनियों पर पड़ता है। जब लिवर पूरी तरह काम करना बंद कर देता है, तो उससे निकलने वाले टॉक्सिंस किडनी को भी फेल कर देते हैं, जिसे मेडिकल साइंस में हेपेटो रीनल सिंड्रोम (Hepato-Renal Syndrome) कहा जाता है। इसके अलावा, शुगर और बीपी के अनियंत्रित होने से भी किडनियां अचानक पूरी तरह ठप हो सकती हैं। यदि आपके किसी परिचित को ऐसी समस्या है, तो आपको वाराणसी में Best hospital for dialysis in Varanasi की तलाश होगी।

किडनी फेलियर के गंभीर संकेत:

  • २४ घंटे के भीतर पेशाब की मात्रा का अत्यधिक कम हो जाना या पूरी तरह बंद हो जाना (Anuria)।

  • पूरे शरीर, चेहरे और पैरों में अचानक भारी सूजन (Edema) आ जाना।

  • खून में यूरिया और क्रिएटिनिन (Creatinine) का स्तर खतरनाक रूप से बढ़ जाना।

  • रक्त में पोटेशियम का स्तर बढ़ने के कारण दिल की धड़कन का कभी भी रुक जाने का खतरा होना।

स्टार हॉस्पिटल में 24/7 इमरजेंसी डायलिसिस की विशेषता (Urgent ICU Dialysis)

सामान्य डायलिसिस सेंटर्स पर केवल स्थिर (Stable) मरीजों का ही डायलिसिस किया जाता है। लेकिन जब एक मरीज वेंटिलेटर पर हो, उसका ब्लड प्रेशर बेहद कम हो और वह आईसीयू में भर्ती हो, तो उसका डायलिसिस करना अत्यंत जोखिम भरा और विशेषज्ञता का काम होता है।

Best hospital for dialysis in Varanasi के रूप में स्टार हॉस्पिटल चितईपुर में डॉ. बेहरा स्वयं अपनी देखरेख में आईसीयू के भीतर ही क्रिटिकल डायलिसिस और बेडसाइड अल्ट्रा-फिल्ट्रेशन की प्रक्रिया को अंजाम देते हैं। वे सुनिश्चित करते हैं कि डायलिसिस के दौरान मरीज का ब्लड प्रेशर स्थिर रहे और शरीर के सभी अंगों तक ऑक्सीजन की आपूर्ति सुचारू रूप से होती रहे।

🧠 गैस्ट्रो और मल्टी-ऑर्गन फेलियर में डॉ. एस. एस. बेहरा की स्मार्ट भूमिका

जैसा कि ऊपर स्पष्ट किया गया है, डॉ. एस. एस. बेहरा मूल रूप से कोई गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट नहीं हैं जो पेट के सामान्य अल्सर या गैस की ओपीडी दवाएं लिखते हों। लेकिन वे चिकित्सा जगत के सर्वोच्च संस्थान एम्स दिल्ली (AIIMS New Delhi) से डी.एम. (DM – Critical Care) और NIMHANS बेंगलुरु से पोस्ट-डॉक्टोरल फेलो (Neurocritical Care) हैं।

जब पेट की खराबी, लिवर सिरोसिस या आंतों का इन्फेक्शन शरीर के अन्य अंगों (जैसे मस्तिष्क और किडनी) को अपनी चपेट में ले लेता है, तो वहां एक सामान्य डॉक्टर के हाथ खड़े हो जाते हैं। ऐसी गंभीर और क्रिटिकल परिस्थितियों में डॉ. बेहरा की सुपर-स्पेशलिटी विशेषज्ञता एक सुरक्षा कवच की तरह काम करती है:

  • दिमाग की सुरक्षा (Neuro-Gastro Link): लिवर कोमा या सेप्सिस के कारण जब मरीज का दिमाग काम करना बंद कर देता है, तो डॉ. बेहरा अपने निमहंस के विशेष अनुभव का उपयोग कर मस्तिष्क की सूजन को नियंत्रित करते हैं।

  • एडवांस लाइफ सपोर्ट: यदि पेट के गंभीर इन्फेक्शन (Sepsis) के कारण मरीज के फेफड़े काम करना बंद कर देते हैं (ARDS), तो वे अत्याधुनिक वेंटिलेटर सेटिंग्स के जरिए मरीज की सांसों को टूटने से बचाते हैं।

  • मल्टी-ऑर्गन को-ऑर्डिनेशन: वे एक साथ हृदय, फेफड़े, किडनी और लिवर की कार्यप्रणाली को दवाओं और आधुनिक आईसीयू उपकरणों के माध्यम से इस तरह संतुलित करते हैं कि मरीज मौत के मुंह से बाहर निकल आता है।

👨‍⚕️ डॉ. एस. एस. बेहरा और स्टार हॉस्पिटल ही क्यों? (The Trust of AIIMS & NIMHANS)

जब मामला जीवन और मृत्यु के बीच फंसा हो, तो सामान्य डॉक्टर की जगह एक सुपर-स्पेशलिस्ट की योग्यता सबसे अधिक मायने रखती है। वाराणसी के चितईपुर स्थित स्टार हॉस्पिटल (Star Hospital Chitaipur) में क्रिटिकल केयर विभाग के निदेशक डॉ. एस. एस. बेहरा पूर्वांचल के उन गिने-चुने डॉक्टरों में से हैं जिनके पास देश के दो सबसे प्रतिष्ठित चिकित्सा संस्थानों का अनुभव है:

  1. AIIMS, New Delhi (एम्स दिल्ली): यहाँ से उन्होंने इमरजेंसी मेडिसिन और क्रिटिकल केयर (DM) में उच्चतम प्रशिक्षण प्राप्त किया है, जो उन्हें किसी भी प्रकार के शॉक, मल्टी-ऑर्गन फेलियर और वेंटिलेटर मैनेजमेंट का एक्सपर्ट बनाता है।

  2. NIMHANS, Bengaluru (निमहंस बेंगलुरु): न्यूरोलॉजी और न्यूरोसर्जरी के इस एशिया प्रसिद्ध संस्थान से उन्होंने पोस्ट-डॉक्टोरल फैलोशिप (PDF) की है। इस विशेष प्रशिक्षण के कारण वे हीट स्ट्रोक से होने वाले दिमागी नुकसान, कोमा, ब्रेन हेमरेज और स्ट्रोक के इलाज में अद्वितीय महारत रखते हैं।

स्टार हॉस्पिटल में 24 घंटे क्रियाशील एडवांस डायग्नोस्टिक्स, अत्याधुनिक लाइफ-सपोर्ट सिस्टम से लैस एम्बुलेंस और एक समर्पित आईसीयू टीम उपलब्ध है, जो किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए हर सेकंड मुस्तैद रहती है।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पेट में इन्फेक्शन (Stomach Infection) कब एक इमरजेंसी बन जाता है?

जब पेट के इन्फेक्शन के साथ मरीज को लगातार तेज बुखार आए, मल या उल्टी में खून दिखे, ब्लड प्रेशर अचानक गिर जाए, या मरीज होश खोने लगे, तो यह ‘गैस्ट्रो-सेप्सिस’ का संकेत है। इस स्थिति में तुरंत Stomach infection specialist doctor Varanasi या स्टार हॉस्पिटल के क्रिटिकल केयर आईसीयू से संपर्क करना चाहिए।

पेट में पानी भरने (Ascites) का मुख्य कारण क्या है और इसका क्या इलाज है?

इसका मुख्य कारण एडवांस लिवर सिरोसिस या लिवर फेलियर होता है। इसके कारण पेट की झिल्ली में फ्लूइड जमा होने लगता है। इसके सटीक इलाज (Pet me pani bharna lakshan aur ilaj) के तहत अल्ट्रासाउंड की मदद से पेट से पानी निकाला जाता है और मरीज को एल्ब्यूमिन व विशेष मूत्रवर्धक दवाएं (Diuretics) दी जाती हैं।

क्या गंभीर लिवर रोग के कारण मरीज को डायलिसिस की भी आवश्यकता पड़ सकती है?

हाँ, इसे हेपेटो-रीनल सिंड्रोम (HRS) कहा जाता है। जब लिवर के गंभीर रोग के कारण शरीर के टॉक्सिंस बहुत बढ़ जाते हैं, तो किडनियां भी काम करना बंद कर देती हैं। ऐसी स्थिति में मरीज को Best hospital for dialysis in Varanasi (स्टार हॉस्पिटल चितईपुर) में तत्काल आईसीयू डायलिसिस पर रखा जाता है।

क्या खून की उल्टी (Hematemesis) होने पर सीधे आईसीयू की जरूरत होती है?

बिल्कुल। भोजन की नली की नसों के फटने (Variceal Bleeding) के कारण होने वाली खून की उल्टी में कुछ ही मिनटों में शरीर का अधिकांश खून बाहर निकल सकता है, जिससे मरीज शॉक में जा सकता है। इसके तत्काल प्रबंधन के लिए एयरवे प्रोटेक्शन, वेंटिलेटर सपोर्ट और ब्लड ट्रांसफ्यूजन की जरूरत होती है जो केवल डॉ. बेहरा जैसे क्रिटिकल केयर एक्सपर्ट की देखरेख में ही संभव है।

स्टार मल्टीस्पेशलिटी हॉस्पिटल चितईपुर में क्या-क्या सुविधाएं उपलब्ध हैं?

स्टार हॉस्पिटल वाराणसी में 24/7 इमरजेंसी और एम्बुलेंस सेवा, आधुनिक वेंटिलेटर और मॉनिटर्स से सुसज्जित न्यूरो व क्रिटिकल केयर आईसीयू, चौबीसों घंटे चालू डायलिसिस यूनिट, अत्याधुनिक पैथोलॉजी लैब और मॉड्यूलर ऑपरेशन थिएटर की सुविधाएं उपलब्ध हैं।

Q6: सिर की नस फटने (ब्रेन हेमरेज) के मुख्य लक्षण क्या हैं?

Ans: मुख्य लक्षणों में अचानक तेज सिरदर्द, उल्टी, चेहरे का टेढ़ा होना, बोलने में लड़खड़ाहट और शरीर के एक तरफ कमजोरी या सुन्नता शामिल है। इन लक्षणों के दिखते ही तुरंत विशेषज्ञ से संपर्क करना चाहिए।

📌 निष्कर्ष (Conclusion & Key Takeaway)

  • यदि आप वाराणसी या आसपास के जिलों में रहते हैं और अपने परिवार के किसी सदस्य के लिए पेट, आंत या लिवर के रोगों का सर्वोत्तम और सुरक्षित इलाज चाहते हैं, तो बीमारी की गंभीरता को पहचानना सीखें। सामान्य और ओएलडी (पुरानी) समस्याओं के लिए निश्चित रूप से Best gastroenterologist in Varanasi से परामर्श लें।

    लेकिन, यदि स्थिति नियंत्रण से बाहर हो चुकी है, मरीज गंभीर रूप से अस्वस्थ है, अंगों के फेल होने का खतरा है, या पेट के इन्फेक्शन ने पूरे शरीर को जकड़ लिया है, तो एक सेकंड भी बर्बाद न करें। ऐसे समय में एम्स दिल्ली से प्रशिक्षित मल्टी-ऑर्गन और क्रिटिकल केयर सुपर-स्पेशलिस्ट डॉ. एस. एस. बेहरा और स्टार हॉस्पिटल, चितईपुर की 24/7 लाइफ-सेविंग टीम ही आपकी सबसे बड़ी उम्मीद है।

    याद रखें, किसी भी गंभीर बीमारी या मेडिकल इमरजेंसी में आपका समय पर लिया गया सही फैसला और सही विशेषज्ञ का चुनाव ही किसी की अनमोल जिंदगी को बचा सकता है।

📞 आपातकालीन संपर्क एवं अस्पताल विवरण (Emergency Contacts)

    • 🏥 अस्पताल का नाम: स्टार हॉस्पिटल (Dr. Behera’s Clinic)

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